“गर्दन कट जाए पर जुबान न कटे”: वादे निभाने के लिए पूर्व मंत्री करतार सिंह भड़ाना ने झोंकी अपनी पूरी ताकत

“गर्दन कट जाए पर जुबान न कटे”: वादे निभाने के लिए पूर्व मंत्री करतार सिंह भड़ाना ने झोंकी अपनी पूरी ताकत

रिपोर्ट – अनिल कुमार

मंगलौर: राजनीति में अक्सर नेता चुनाव जीतने के बाद वादों को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं, लेकिन पूर्व कैबिनेट मंत्री करतार सिंह भड़ाना ने एक नई इबारत लिख दी है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके हालिया संकल्प की जमकर चर्चा हो रही है। भड़ाना जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है— “विधायक बनूँ या न बनूँ, जनता का कर्ज चुका कर जाऊँगा।”

अपनी मेहनत की कमाई से पूरे कर रहे हैं जन-सेवा के संकल्प
आमतौर पर विकास कार्य सरकारी फंड के भरोसे रहते हैं, लेकिन करतार सिंह भड़ाना ने एक अलग ही मिसाल पेश की है। वे जनता से किए गए अपने पुराने वादों को निभाने के लिए अपनी निजी संपत्ति और मेहनत की गाढ़ी कमाई खर्च कर रहे हैं। उनका मानना है कि जनता को दिया गया वचन उनके लिए किसी भी पद या सत्ता से ऊपर है।
ईश्वर से प्रार्थना: “वचन न टूटे”
भड़ाना जी ने भावुक होते हुए ईश्वर से प्रार्थना की, “हे प्रभु, चाहे गर्दन कट जाए पर मेरी जुबान न कटे।” उनके इस बयान ने समर्थकों में जोश भर दिया है। उनका कहना है कि एक नेता की सबसे बड़ी पूंजी उसका ‘ईमान’ और उसकी ‘कथनी-करनी की समानता’ होती है।

पद का मोह नहीं: उन्होंने साफ किया कि सेवा करने के लिए उन्हें किसी विधायक की कुर्सी की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।

कर्ज का अहसास: वे जनता के प्यार और विश्वास को एक ‘कर्ज’ की तरह देखते हैं, जिसे उतारना वे अपना परम धर्म मानते हैं।

ईमानदारी की मिसाल: खुद के पैसे से जनकल्याण के कार्यों को पूरा करना उनकी ईमानदारी और जन-सेवा के प्रति अटूट निष्ठा को दर्शाता है।

राजनीति मेरे लिए व्यापार नहीं, बल्कि सेवा का एक माध्यम है। मैंने जो कहा है, वह मैं हर हाल में पूरा करूँगा।” — करतार सिंह भड़ाना

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Author: JB TV 24 NEWS

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